Strait of Hormuz: सुपरपावर क्यों दिख रही है मजबूर ?

 

Strait of Hormuz और AMERICA: ताकतवर सुपरपावर क्यों दिख रही है मजबूर ? क्या ईरान ने अमेरिका को झुका दिया? Strait of Hormuz Crisis: जानें भारत और पूरी दुनिया पर कितना बड़ा असर होगा ??




आइए जानते हैं स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ (Strait of Hormuz) क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है।जिसके बंद होने के खतरे से पूरी दुनिया में Energy Crisis (Crude Oil और LNG Gas संकट) गहरा गया है। इसने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है,जहां पर United States जैसी महाशक्ति भी चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही.



स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz एक संकरे पानी का रास्ता है जो ओमान और ईरान के बीच में स्थित है और इसका कुछ हिस्सा United Arab Emirates से भी लगा हुआ है। जो मुख्य रूप से फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ ) को गल्फ of ओमान से जोड़ता है जो आगे जाकर अरब सागर में मिल जाता है। स्ट्रेट (Strait) का मतलब यह होता है एक संकरा रास्ता जो दो समुद्रीय महासागरों को आपस में जोड़ता है

स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz फ़ारस की खाड़ी पर्शियन गल्फ और गल्फ का ओमान के को जोड़ता है पर्शियन गल्फ से होते हुए गल्फ का ओमान में आते हैं फिर वहां से अरब सागर के अरब सागर से होते हुए पूरी दुनिया में चले जाते हैं

यह व्यापार एक महत्वपूर्ण रास्ता है जो इन दोनों बहुत ज्यादा चर्चा में है जब से ईरान ने इस पर ब्लॉक की किया है इसकी लंबाई लगभग 167 km किलोमीटर के बीच है वहीं पर इसकी चौड़ाई अलग-अलग है इसका सबसे संकरा पॉइंट लगभग 33-37 किलोमीटर के आसपास है वही सबसे चौड़ा पॉइंट लगभग 97 किलोमीटर के आसपास है.




इस दुनिया का चौक पॉइंट भी कहा जाता है यहां से लगभग daily 20 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट गुजरते हैं जो लगभग पूरी विश्व की सप्लाई का 20 से 25% होता है यहां से दुनिया की लगभग 20% LNG GAS गैस की सप्लाई दुनिया भर में होती है






भारत अपनी उर्जा जरूर में से क्रूड ऑयल (CRUID OIL) KA लगभग 50 से 55% और अपनी एलपीजी LPG खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से आता है।

खाड़ी देशों (GULF COUNTRY) INDIA KO क्रूड ऑयल (CRUID OIL) सप्लाई करने वालो देश में सऊदी अरब लगभग एक 15 से 16% इराक 20 से 22% और यूएई लगभग 8 से 15% क्रूड ऑयल की सप्लाई भारत को करते हैं वहीं अगर नेचुरल गैस (LPG) की बात करें तो भारत लगभग 60% से आयात करता है और इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा INHI GULF COUNTRY SE ATA HAI.


 भारत  को प्राकृतिक गैस (NATURAL GAS) और एलएनजी (LNG)आपूर्तिकर्ता  देश-


भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरतों का आयात करता है, जिनका उपयोग उर्वरक संयंत्रों, बिजली संयंत्रों और शहरी गैस नेटवर्क को चलाने के लिए किया जाता है।

• कतर: = 47%

• संयुक्त अरब अमीरात (यूएई): = 13.5%

• संयुक्त राज्य अमेरिका: = 10.5%

• अन्य आपूर्तिकर्ता: ओमान, अंगोला और नाइजीरिया जैसे देश छोटी मात्रा में आपूर्ति करते हैं।


JAANE PM MODI NE DESH SE KYA APEEAL KI



खाना पकाने की गैस LPG (एलपीजी) आपूर्तिकर्ता:

भारत दुनिया में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। घरेलू एलपीजी का लगभग 60% आयात किया जाता है,

कतर: सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता, जो एलपीजी आयात का लगभग 29% से 34% प्रदान करता है।

• संयुक्त अरब अमीरात: दूसरा सबसे बड़ा, जो आयात का लगभग 26% हिस्सा प्रदान करता है।

• अन्य: कुवैत, सऊदी अरब, ओमान और अमेरिका शेष हिस्से का निर्माण करते हैं।


एलएनजी LNG GAS गैस प्राकृतिक गैस के रूप में विनाशकारी है और इसे स्टोर करने का तरीका अलग होता है। यह तरल पदार्थ के रूप में बेहद कम तापमान पर रखा जाता है। एलएनजी का उपयोग मुख्य रूप से अधिक ऊर्जा की आवश्यकता वाले माप और औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है।
LPG GAS एलपीजी GAS क्रूड ऑयल से पेट्रोलियम उत्पाद बनते समय बायप्रोडक्ट निकलती है इसका प्रयोग घरो में खाना बनाना होता है

यह सारा इंपोर्ट भारत में स्टेट ऑफ हार्मोन के थ्रू ही आता है तो अगर यहां पर किसी भी तरह की कोई भू-राजनीतिक संकट या और कोई घटना होती है तो इसका दुनिया के साथ-साथ भारत की ऊर्जा जरूरतों पर बहुत गहरा असर होता है यहां से लगभग पूरी दुनिया के 20% क्रूड ऑयल और लगभग लगभग 20 से 25% LNG गैस के सप्लाई दुनिया में होती है तो इसके किसी भी तरह बंद होने से पूरी दुनिया की ENERGY जरूरत पर बहुत गहरा असर होता है

वैसे तो यह स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़" Strait of Hormuz अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में आता है और पूरी दुनिया के जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं बिना किसी टोल या किसी फीस पेमेंट के, लेकिन हाल ही के दिनों में जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के ऊपर हमला किया उसके बाद से ईरान ने इसको बंद कर दिया है.




 

इसी रास्ते से इराक कुवैत सऊदी अरब बहरीन कतर यूएई और ओमान तथा ईरान का क्रूड ऑयल और LNG GAS और एलपीजी LPG गैस गुजरती है जो स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़" Strait of Hormuz से होते हुए अरेबियन सी Arabian Sea में जाकर पूरी दुनिया को सप्लाई होती है इसके बंद होने का मतलब है पूरी दुनिया में एनर्जी क्राइसिस आना. इसके बंद होने का मतलब है कि खाड़ी देश” जिनका क्रूड ऑयल CURID OIL और एलएनजी LNG GAS गैस इस रास्ते से सप्लाई होती है उनकी इकोनामी सीधी से प्रभावित होती है जिनके अंदर इराक, कुवैत ,सऊदी अरब बहरीन ,कतर ,यूएई, और ओमान है इसी रास्ते से ईरान का क्रूड ऑयल और गैस भी गुजरती है



दुनिया पर प्रभाव (Impact on the World)-


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1. तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी

दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का परिवहन Strait of Hormuz से होता है
इस मार्ग के बंद होने से तुरंत सप्लाई बाधित हो जाएगी
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है

2. प्राकृतिक गैस (LNG) में बाधा

खाड़ी देशों से होने वाला बड़ा LNG निर्यात रुक सकता है
बिजली उत्पादन और औद्योगिक ईंधन पर असर पड़ेगा
आयात करने वाले देशों में ऊर्जा की कमी हो सकती है

3. वैश्विक महंगाई में वृद्धि

ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ेगी
खाद्य और जरूरी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी
विकसित और विकासशील दोनों देशों में महंगाई बढ़ेगी

4. वैश्विक व्यापार में बाधा

जहाजों को लंबे वैकल्पिक रास्ते अपनाने होंगे जिससे शिपिंग लागत और डिलीवरी समय बढ़ जाएगा
सप्लाई चेन (तेल, केमिकल, सामान) प्रभावित होगी

5. औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

ऊर्जा पर निर्भर उद्योग (स्टील, केमिकल, ट्रांसपोर्ट) प्रभावित होंगे
उत्पादन लागत बढ़ेगी और आउटपुट कम हो सकता है

6. भू-राजनीतिक तनाव बढ़ना

क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ सकती है
क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने का खतरा रहेगा
वैश्विक शक्तियाँ समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने में हस्तक्षेप कर सकती हैं



और बात करें एशिया की जिसके अंदर जो बड़े देश है चीन इंडिया जापान और साउथ कोरिया इनका लगभग 80% ऊर्जा जरूर भूतों का हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz से होकर गुजरता है

भारत दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है हाल ही में कुछ कुछ सालो रूस से तेल इंपोर्ट करना चालू किया है जो कि अमेरिका के सैंक्शन और दबाव मैं वापस कम हो गया. भारत के पारंपरिक ऊर्जा सप्लायर है वह खाड़ी देश से आते हैं. स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़" Strait of Hormuz के बंद होने का मतलब है कि भारत में एनर्जी क्राइसिस आना क्योंकि भारत के लिए यह रास्ता सस्ता और लाभकारी है



भारत पर इसका विस्तृत प्रभाव-


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कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर बड़ा असर


भारत अपनी तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और इसका काफी हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
भारत को वैकल्पिक रास्तों और महंगे स्रोतों से तेल लेना पड़ेगा
पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं

        



2. LPG और गैस सप्लाई प्रभावित


भारत घरेलू गैस (LPG) और LNG का बड़ा आयात करता है।
खाना पकाने वाली गैस की लागत बढ़ सकती है
बिजली उत्पादन (गैस आधारित प्लांट) प्रभावित हो सकता है

3. महंगाई (Inflation) में तेज बढ़ोतरी


तेल और गैस महंगे होने से पूरे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा:
ट्रांसपोर्ट महंगा → सामान की कीमतें बढ़ेंगी
खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं
आम जनता की जीवन लागत बढ़ जाएगी

4. ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर असर

डीजल महंगा होने से ट्रक, ट्रेन और शिपिंग खर्च बढ़ेगा
सप्लाई चेन धीमी हो सकती है
ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग पर असर पड़ेगा

5. व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ेगा

भारत को ज्यादा महंगा तेल खरीदना पड़ेगा
विदेशी मुद्रा (डॉलर) खर्च बढ़ेगा
रुपये पर दबाव पड़ सकता है

6. बिजली उत्पादन और उद्योग पर असर

गैस आधारित पावर प्लांट की लागत बढ़ेगी
इंडस्ट्री (स्टील, केमिकल, फर्टिलाइजर) महंगी हो जाएगी
उत्पादन धीमा हो सकता है

7. आर्थिक और वित्तीय दबाव

शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है
महंगाई बढ़ने से RBI पर दबाव बढ़ेगा
आर्थिक विकास दर धीमी हो सकती है





वहीं ईरान का कहना है कि वह स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz को तब तक नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका और इज़राइल ईरान पर हमले बंद नहीं करते और गारंटी दे कि आगे भी हो दोबारा कभी ईरान के ऊपर हमले नहीं करेंगे. उसके बाद ही वह स्टेट आफ हॉरमोन उसको खोलेगा.

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स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz को ईरान ने बंद किया हुआ है यहां पर IRAN KI ज्योग्राफी उसकी हेल्प कर रही है पूरा ईरान एक पठारी क्षेत्र पर फैला हुआ है। जिस वजह से वहां पर” बहुत सी पहाड़ियां है जो IRAN जो ईरान में चारों तरफ फैली हुई है यहां की सबसे बड़ी जो पर्वत श्रृंखला है वह है जगरोस माउंटेन इसके अलावा अल्बर्ट्स पर्वत श्रंखला आलम को है सब आनंद तथा हजरत पर्वत श्रृंखलाएं हैं ज्ञान की पश्चिमी जहां की स्टेट आफ हॉरमोन स्थित है जगरूस प्रोत्साला गुजरती है जो काफी ऊंची है

यहां से ईरान स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz से यह गुजरने वाले किसी भी व्यापारी जहाज और नौसेना के जहाज पर आसानी से हमला कर सकता है। लेकिन पहाड़ी श्रृंखला होने के कारण पड़ोसी देश यूएई, सऊदी अरब, ओमान, क़तर या कोई भी दूसरा देश वापस ईरान पर हमला उसे सटीकता से नहीं कर सकता जिस सटीकता से ईरान करता है यह पहाड़ी श्रृंखला उसके लिए एक नेचुरल डिफेंस का काम करती है.

अमेरिका भी ईरान के ऊपर सिर्फ हवाई हमले कर रहा है अभी तक उसने नेवी या जमीनी आक्रमण के बारे में नहीं सोचा क्योंकि उसकी ईरान की जियोग्राफी इतनी विविध से कहीं पर पहाड़ कहीं पर डेजर्ट तो जमीनी आक्रमण करना बहुत मुश्किल है इसलिए ट्रंप अभी बैक फुट पर है ना ट्रंप अपनी नेवी को भेज सकते ईरान पर हमला करने के लिए ना ही जमीनी आक्रमण (ग्राउंड इन्वेंशन) कर सकते हैं क्योंकि पहाड़ी एरिया होने की वजह से ईरान की आर्मी के पास एक एडवांटेज है कि वह अपने आप और हथियार को छिपाकर गुरिल्ला तकनीक से लड़कर अमेरिका को अधिक नुकसान पहुँचा सकता है।

और ऊपर से स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़ Strait of Hormuz का पानी इतना गहरा नहीं है कि वहां United States की नौसेना के युद्धपोत आकर रुक सकते हैं। ईरान सैनिक पहाड़ों में बैठकर अमेरिकी युद्धपोत को ज्यादा नुकसान पहुँचा सकते हैं . ग्राउंड इनवेज़न (जमीनी आक्रमण) जैसे विकल्प पर विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से यह माना “गया कि ऐसे बड़े पैमाने के सैन्य अभियानों में अमेरिकी सेना को गंभीर नुकसान और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, कांग्रेस (Congress) में भी पूर्ण युद्ध (full-scale war) पर सहमति नहीं बनी.

अभी ट्रंप सिर्फ कूटनीतिक तरीके से खुलवाने की सोच रहे हैं। Donald Trump की  कथित 13–15 के बीच चीन यात्रा को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने China के माध्यम से Iran के साथ कूटनीतिक बातचीत कर Strait of Hormuz को खुलवाने का प्रयास किया था। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों में इस प्रकार की किसी विशेष यात्रा या ऐसे किसी मध्यस्थता मिशन की पुष्टि नहीं मिलती है

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वहीं ईरान अपनी जियोग्राफी का एडवांटेज लेकर स्टेट ऑफ फॉर्म उसको बंद कर दिया और सिर्फ अपनी परमिशन से ही शिप को गुजरने दे रहा है.

ईरान द्वारा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और वहां के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना-

साथ ही ईरान, अमेरिका के उन सैन्य ठिकानों को भी निशाना बना रहा है जो उसके सहयोगी देशों में मौजूद हैं। इसके अलावा, वह इन देशों के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी टारगेट कर रहा है। जिसके कारण अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा में भारी संसाधन लगाने पड़ रहे हैं। साथ ही, उसे खाड़ी देशों में मौजूद अपने सहयोगियों की रक्षा भी करनी पड़ रही है, जिन्हें ईरान आसानी से निशाना बना सकता है। क्योंकि जैसे ही अमेरिका ईरान पर कोई स्ट्राइक करता है, ईरान सीधे उन देशों में मौजूद अमेरिकी बेस और वहां के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। यही कुछ कारण हैं जो अमेरिका को पूर्ण स्तर पर युद्ध छेड़ने से रोक रहे हैं।


अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी देशों का रुख-



ट्रंप का ईरान पर सीधा ग्राउंड इनवेजन फुल स्केल युद्ध नहीं करने का एक कारण और हो सकता है उसके यूरोपीय सहयोगी United Kingdom, France, Germany, Italy, Spain और अन्य यूरोपीय देशों का ट्रंप के साथ खुलकर न आना भी एक बड़ा कारण माना जा सकता है।


हमें समय में कुछ कुछ साल पीछे जाना पड़ेगा जब यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध शुरू हुआ तो अमेरिका ने जो बाइडेन के समय यूक्रेन को आर्म्स और इंटेलिजेंस प्रोवाइड करवाई लेकिन जब TRUMP जीत के सत्ता में आए तो उन्होंने सप्लाई भी काम की और इंटेलिजेंस भी काम की और जो भी पुतिन के साथ मीटिंग हुई उसके बाद ट्रंप ने क्लियर कहा कि जितने भाग पर रूस ने कब्जा कर लिया है वह भाग रसिया को दे दिया जाए उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को अमेरिका बुलाकर इंसल्ट भी कि तुम वर्ल्ड वॉर 3 शुरू करवा सकते हो.

इस बात से यूरोप अच्छा खासा नाराज हो गया जो भी यूरोप के पावरफुल कंट्री यूनाइटेड किंगडम जर्मनी फ्रांस और इटली United Kingdom ट्रंप के बिहेवियर से काफी नाराज हो गए और हाल ही में ट्रंप ने बीच में एक और विवादित बयान दिया है कि वह ग्रीनलैंड को कब्जा कर लेंगे क्योंकि उन्हें लगता है कि वह उसकी की सुरक्षा के लिए खतरा है वहां रूस और चीनी के जहाज़ आते रहते हैं इसलिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा होना चाहिए. इस बात से यूरोप और अमेरिका के रिश्ते और भी ज्यादा खराब हो गए क्योंकि यूरोप को ऐसा लगता है कि अमेरिका ने उन्हें धोखा दिया है और उन्हें यूक्रेन युद्ध में उसे तरह की सहायता नहीं थी जैसी करनी चाहिए ,वह पुतिन की भाषा बोल रहे हैं,




 

Donald Trump ने यह भी चेतावनी दी कि अगर तुम मेरी बात नहीं मानते हो तो यह समझ लेना की NATO खत्म हो जाएगा क्योंकि नाटो में अमेरिका ही सबसे पावरफुल कंट्री है और सबसे ज्यादा फंड अमेरिका ही देता है यहां तक की ट्रंप ने नाटो कंट्रीज को प्रेशराइज किया कि आप भी अपना सभी खर्च बढ़ाओ अमेरिका ही आपका खर्च कब तक उठाता रहेगा इस बात से ज्यादातर यूरोपीयन कंट्रीज नाराज थी.


और जब अमेरिका ईरान के साथ में युद्ध में उलझ गया तब यूरोप से वैसा ही किया उन्होंने भी यूरोप अमेरिका का साथ देने से डायरेक्ट साथ देने से मना कर दिया यहां तक की यूरोप के कंट्री ने अपनी ARMY BASE का भी इस्तेमाल अमेरिका के करने के लिए भी मना कर दिया शायद यही वह रीजन एस है जिससे कि अमेरिका बैक फुट पर है.और क्योंकि Russia और China पहले से ही ईरान को सपोर्ट कर रहे हैं तो अगर युद्ध फुल स्केल पर होता है तो पूरी संभावना है कि रूस और चीन ईरान को आर्म्स और अन्य इंटेलिजेंस उपलब्ध कराएंगे. और इतनी दूर से आकर अमेरिका के लिए लॉजिस्टिक मेंटेन करना भी बहुत मुश्किल होगा.

इसके अलावा ईरान आसानी से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है जो की कतर बहरीन कुवैत यूएई और सऊदी अरब में है उनको आसानी से वहां से टारगेट कर सकता है जिसे जिसके लिए उसे किसी एडवांस्ड मिसाइल या वेपंस की जरूरत नहीं है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ हार्मूज़" Strait of Hormuz सिर्फ कुछ मिल और किलोमीटर ही छोड़ा है अमेरिका के लिए वापस ईरान पर हमला करना से ईरान का कम नुकसान होता है बहुत कम नुकसान होने की संभावना रहती है.


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