क्या भारतीय तेल कंपनियां सच में घाटे में हैं? आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं



क्या भारतीय तेल कंपनियां सच में घाटे में हैं? आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं







अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी आ गई। इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दिया, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।



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इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील ने लोगों को चिंता में डाल दिया. हालांकि बाद में पेट्रोलियम विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि भारत की आयात क्षमता फिर से सामान्य स्थिति में पहुंच गई है और अब भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है।

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लेकिन हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri द्वारा दिया गया यह बयान कि तेल कंपनियां घाटे में चल रही हैं, एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या कंपनियां वास्तव में घाटे में हैं या फिर इसके पीछे कोई और वजह है।


बंगाल चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। चुनाव के दौरान लंबे समय तक दाम लगभग स्थिर रखे गए थे, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद धीरे-धीरे कीमतें बढ़ने लगीं। कुछ ही दिनों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में कई बार बढ़ोतरी हुई, जिससे कुल मिलाकर करीब ₹7 से ₹8 प्रति लीटर तक का असर देखा गया।

भारत में जब भी पेट्रोल, डीजल या CNG की कीमतें बढ़ती हैं, तो अक्सर यह कहा जाता है कि सरकारी तेल कंपनियां भारी घाटे में चल रही हैं। या तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल ऊंची कीमतों पर खरीदना पड़ रहा है .इसी कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है

लेकिन अगर हम हाल के वित्तीय आंकड़ों को ध्यान से देखें, तो तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है।




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भारत की तीन सबसे बड़ी तेल कंपनियां — Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) — ने FY 2025-26 में रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है।


इन तीनों कंपनियों का संयुक्त नेट प्रॉफिट लगभग ₹77,280 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 130% अधिक है।




आखिर कितना हुआ मुनाफा?


Indian Oil Corporation (IOCL वार्षिक लाभ में लगभग 183% की बढ़ोतरीकुल नेट प्रॉफिट लगभग ₹36,802 करोड़ है। जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में अकेले लगभग ₹11,377 करोड़ का लाभयह दिखाता है कि देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी अभी भी बेहद मजबूत स्थिति में है।


Hindustan Petroleum (HPCL) के ⁠नेट प्रॉफिट में 133% से अधिक की बढ़ोतरी हुई. Q4 FY26 में लगभग ₹4,901 करोड़ का मुनाफा कमाया.

Bharat Petroleum (BPCL) के वार्षिक लाभ में लगभग 75% की बढ़ोतरी हुई. नेट प्रॉफिट बढ़कर लगभग ₹23,303 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष यह लगभग ₹13,215 करोड़ था Q4 FY26 में लगभग ₹3,191 करोड़ का लाभ



फिर जनता को महंगा पेट्रोल क्यों मिल रहा है? यही सबसे बड़ा सवाल है।




2014 बनाम आज की कीमतों की तुलना



26 मई 2014 के आंकड़े


पेट्रोल (दिल्ली): ₹71.41 प्रति लीटर

डीजल (दिल्ली): ₹56.71 प्रति लीटर

CNG (दिल्ली): ₹38.15 प्रति किलो

डॉलर रेट: ₹58.59 प्रति डॉलर

इंडियन क्रूड बास्केट: लगभग $108 प्रति बैरल




May 2026 के आंकड़े -


पेट्रोल (दिल्ली): ₹102.12 प्रति लीटर

डीजल (दिल्ली): ₹95.20 प्रति लीटर

CNG (दिल्ली): ₹83.09 प्रति किलो

डॉलर: लगभग ₹95.60 प्रति डॉलर

ग्लोबल क्रूड: लगभग $98.59 प्रति बैरल



जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों की बात होती है, तो 2 मुख्य बातें समझना जरूरी है।


Indian Basket Crude Oil - वह औसत कीमत (benchmark) है जिस पर भारत कच्चा तेल आयात करता है। जैसे आप कोई सामान खरीदो और उसमें delivery charge price में मिलाकर final bill बने — वैसे ही Indian Basket Crude Oil का मतलब यह है कि:

जब किसी oil exporting country (जैसे Gulf countries) से crude oil निकलकर shipping + insurance के साथ भारत तक पहुँचता है तो उसकी जो final “landed cost” होती है (भारत तक आने के बाद की कीमत) उसी के average को Indian Basket price बोला जाता है

Brent crude - अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil की एक reference price होती है, जिसके आधार पर global market में crude oil की कीमतें तय होती हैं। यह तेल मुख्य रूप से North Sea (यूके और नॉर्वे के बीच का समुद्री क्षेत्र) से निकाला जाता है।



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सबसे दिलचस्प बात: 2020 में तेल बेहद सस्ता था -


कोविड काल में एक समय ऐसा भी आया जब ब्रेंट क्रूड गिरकर लगभग Brent Crude: लगभग $20–$25 प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत की क्रूड बास्केट भी लगभग $30–$40 प्रति बैरल प्रति बैरल पर आ गई यानि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इतिहास के सबसे निचले स्तर पर थीं। लेकिन इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतनी बड़ी राहत देखने को नहीं मिली, जितनी आम लोग उम्मीद कर रहे थे।


क्या कंपनियां वास्तव में नुकसान में हैं?









अगर किसी कंपनी को लगातार हजारों करोड़ का मुनाफा हो रहा हो, तो उसे “भारी घाटे” वाली कंपनी कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। हाल के वित्तीय आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि भारतीय तेल कंपनियां उतने दबाव में नहीं हैं जितना आम तौर पर प्रचारित किया जाता है।

जनता के मन में सवाल उठते हैं जब कच्चा तेल सस्ता होता है, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगे रहते हैं इसी वजह से तेल कंपनियों के मुनाफे और ईंधन कीमतों को लेकर बहस लगातार बढ़ रही है।



बढ़े हुए पेट्रोल और डीज़ल के दामों का आम लोगों पर कई सीधा असर पड़ता है:


रोज़मर्रा की महंगाई बढ़ती है
ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है
सब्ज़ी, दूध, अनाज जैसी चीज़ों के दाम बढ़ जाते हैं क्योंकि उनका ढुलाई खर्च बढ़ता है

यात्रा खर्च बढ़ता है
बस, ऑटो, टैक्सी किराया बढ़ जाता है
लोग अपनी रोज़ की यात्रा में ज्यादा पैसा खर्च करते हैं

. सामान और सेवाएँ महंगी हो जाती हैं
फैक्ट्री और कंपनियों का उत्पादन खर्च बढ़ता है
इसका असर हर चीज़ के दाम पर पड़ता है (कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि)

घर का बजट बिगड़ता है
आम परिवार का मासिक खर्च बढ़ जाता है
बचत (saving) कम हो जाती है

गरीब और मध्यम वर्ग पर ज्यादा असर
जिनकी आय स्थिर है, उनके लिए महंगाई संभालना मुश्किल हो जाता है
दैनिक मजदूर और नौकरीपेशा लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं








आसान भाषा में:

पेट्रोल-डीजल महंगा होने का मतलब है “हर चीज़ महंगी होना”, क्योंकि पूरी अर्थव्यवस्था ट्रांसपोर्ट पर चलती है।

जब कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत बढ़ती है तो पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है, लेकिन जब क्रूड सस्ता होता है तब भी पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं होता.

हर बार जब पेट्रोल-डीजल या दूसरी जरूरी चीजों की कीमत बढ़ती है, तो उसका सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ता है। तेल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, कच्चा माल और उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर कंपनियों पर भी पड़ता है। कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को अपने उत्पादों की कीमत में जोड़कर ग्राहकों से वसूल लेती हैं, इसलिए अंतिम बोझ फिर से आम उपभोक्ता पर ही आ जाता है।





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